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		<title>Culture & Heritage - Indore Meri Pehchan - Latest Hindi News</title>
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		<![CDATA[
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		<lastBuildDate>Thu, 28 Jul 2022 10:28:06 +0000</lastBuildDate>
		<pubDate>Thu, 28 Jul 2022 10:28:06 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ जानें यहाँ की 45 साल पुरानी इस अनूठी परंपरा को, जहाँ 15 अगस्त से पहले मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस ]]></title>
            <description><![CDATA[ अगले महीने की 15 तारीख को हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं. आजादी के अमृत महोत्सव के तहत देश भर में स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ का जश्न 15 अगस्त को जोर-शोर से मनाने की तैयारियां जारी हैं. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि उज्जैन और मंदसौर के दो प्रसिद्ध मंदिरों में आज 27 जुलाई को ही देश का 75वां स्वतंत्रता दिवस मना लिया गया है. 19 दिन पहले ही मनाया गया स्वतंत्रता दिवस दरअसल, मध्य... ]]></description>
            <link>https://indoremeripehchan.in/culture-and-heritage/learn-about-this-unique-45-year-old-tradition-here-where-independence-day-is-celebrated-before-augus</link>
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            <pubDate>Thu, 28 Jul 2022 10:28:06 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ कही बाहर क्यों जाए घूमने, जब इंदौर में ही हैं दिल को छू लेने वालीं जगह, जाने इंदौर की बेहतरीन जगह के बारें में ]]></title>
            <description><![CDATA[ अगर आप इंदौर से हैं या अभी इंदौर में हैं और पार्टनर के साथ बिताने के लिए कुछ जगह ढूंढ रहे हैं तो आज हम आपको इंदौर की कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में बताएंगे जो कपल्स के लिए बेहतरीन हैं. जिसमें वो क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं, तस्वीरें खींच सकते हैं और मेमोरीज क्रिएट कर सकते हैं. राजवाड़ा पैलेस (Rajwada Palace) इंदौर का राजवाड़ा पैलेस भारत के सबसे फेमस पैलेस में से एक है. कपल्स के लिए क्वालिटी टाइम... ]]></description>
            <link>https://indoremeripehchan.in/culture-and-heritage/why-go-out-somewhere-when-there-is-a-heart-touching-place-in-indore-know-about-the-best-place-in-ind</link>
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            <pubDate>Thu, 28 Jul 2022 10:20:18 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : विक्‍टोरिया मेमोरियल ]]></title>
            <description><![CDATA[ विक्‍टोरिया मेमोरियल कोलकाता के प्रसिद्ध और सुंदर स्‍मारकों में से एक है। इसका निर्माण 1906 और 1921 के बीच भारत में रानी विक्‍टोरिया के 25 वर्ष के शासन काल के पूरा होने के अवसर पर किया गया था। वर्ष 1857 में सिपाहियों की बगावत के बाद ब्रिटिश सरकार ने देश के नियंत्रण का कार्य प्रत्‍यक्ष रूप से ले लिया और 1876 में ब्रिटिश संसद ने विक्‍टोरिया को भारत की शासक घो‍षित किया। उनका कार्यकाल 1901 में उनकी मृत्‍यु के साथ... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:42:10 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : सिकंदरा का किला ]]></title>
            <description><![CDATA[ सिकंदरा का किला आगरे के किले से केवल 13 किलो मीटर की दूरी पर है जो मुगल बादशाह अकबर का अंतिम विश्राम स्‍थल है। अकबर एक महानतम मुगल शासकथा और अपने समय का सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष सोच वाला बादशाह था। वह परिष्‍करण की लम्‍बी परम्‍परा का उत्तराधिकारी, कलाओं का एक महान संरक्षक, साहित्‍य, दर्शन और विज्ञान का पारखी था। अकबर के इस स्‍मारक में जाने पर अकबर के व्‍यक्तित्‍व की सम्‍पूर्णता का पता लगता है, जैसा कि मुमताज महल... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:40:50 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : भीमबेटका की पहाड़ी गुफाएं ]]></title>
            <description><![CDATA[ भीमबेटका की पहाड़ी गुफाओं को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत स्‍थल के रूप में मान्‍यता दी गई है जो मध्‍य प्रदेश राज्‍य के मध्‍य भारतीय पठार के दक्षिण सिरे पर स्थित विंध्‍याचल पर्वत की तराई में मौजूद हैं। भीमबेटका को भीम का निवास भी कहते हैं (हिन्‍दू धर्म ग्रंथ महाभारत के अनुसार पांच पाण्‍डव राजकुमारों में से भीम द्वितीय थे)। सेंड स्टोन के बड़े खण्‍डों के अंदर अपेक्षाकृत घने जंगलों के ऊपर प्राकृतिक पहाड़ी के अंदर पांच समूह हैं, जिसके अंदर... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:39:09 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : कुतुब मीनार ]]></title>
            <description><![CDATA[ कुतुब मीनार लाल और बफ सेंड स्टोन से बनी भारत की सबसे ऊंची मीनार है। 13वीं शताब्‍दी में निर्मित यह भव्‍य मीनार राजधानी, दिल्‍ली में खड़ी है। इसका व्‍यास आधार पर 14.32 मीटर और 72.5 मीटर की ऊंचाई पर शीर्ष के पास लगभग 2.75 मीटर है। यह प्राचीन भारत की वास्‍तुकला का एक नगीना है। इस संकुल में अन्‍य महत्‍वपूर्ण स्‍मारक हैं जैसे कि 1310 में निर्मित एक द्वार, अलाइ दरवाजा, कुवत उल इस्‍लाम मस्जिद; अलतमिश, अलाउद्दीन खिलजी तथा इमाम... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:36:15 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : मैसूर का महल ]]></title>
            <description><![CDATA[ मैसूर कर्नाटक के दक्षिण भारतीय राज्‍य में एक प्रमुख शहर है। स्‍वतंत्रता तक यह मैसूर के पूर्व महाराजा वोडेयार की राजधानी हुआ करता था। बैंगलोर से 140 किलो मीटर की दूरी पर मैसूर ने सदैव अपने भव्‍य महलों, सुंदर उद्यानों और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत से पर्यटकों और अतिथियों को आमंत्रित किया है। यह शहर अपने रेशम और मनमोहक चंदन की लकड़ी और सुगंधित धूप के केन्‍द्र के रूप में प्रसिद्ध है। आज मैसूर अपने सुविधाजनक आकार और अच्‍छे मौसम... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:11:20 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : महाबोधि मंदिर संकुल, बोध गया ]]></title>
            <description><![CDATA[ बोध गया में स्थित महाबोधि मंदिर का संकुल भारत के पूर्वोत्तर भाग में बिहार राज्‍य का मध्‍य हिस्‍सा है। यह गंगा नदी के मैदानी भाग में मौजूद है। महाबोधि मंदिर बुद्ध भुगवान की ज्ञान प्राप्ति के स्‍थान पर स्थित है। बिहार महात्‍मा बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्‍थानों से एक है और यह विशेष रूप से उनके ज्ञान बोध की प्राप्ति से जुड़ा हुआ है। प्रथम मंदिर तीसरी शताब्‍दी बी. सी. में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित कराया गया... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 14:07:16 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : क्‍ये मठ ]]></title>
            <description><![CDATA[ क्‍ये मठ काज़ा के उत्तर में 12 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है और यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्‍पीति की पश्चिमी आबादी के साथ जुड़ा है। यह घाटी का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मठ है तथा ये गांव के ऊपर (4116 मीटर) पर स्थित है। यहां महात्‍मा बुद्ध के सुंदर शिला लेख और चित्र रखे गए हैं तथा साथ ही अन्‍य देवी देवताओं के चित्र भी हैं। यहां लामा नृत्‍य, गीत गायन और नाटकों में पाइपों... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:59:58 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : जंतर मंतर दिल्‍ली ]]></title>
            <description><![CDATA[ पहली नजर में जंतर मंतर आधुनिक कला की एक कला दीर्घा प्रतीत होता है। यद्यपि यह जयपुर के सवाई जिया सिंह द्वितीय (1699 - 1743) द्वारा बनाई गई वेध शाला है। एक उत्‍सुक खगोल शास्‍त्री और मुगल दरबार के एक प्रतिष्ठित व्‍यक्ति के रूप में वे पीतल और धातु की बनी ज्‍योतिष शास्‍त्र से संबंधी वस्‍तुओं की त्रुटियों से असंतुष्‍ट रहते थे। अपने शासक के संरक्षक में उन्‍होंने उस समय मौजूद खगोल विज्ञान की तालिकाओं में सुधार किया और अधिक... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:56:01 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : इंडिया गेट ]]></title>
            <description><![CDATA[ यमुना नदी के किनारे स्थित दिल्‍ली शहर भारत की राजधानी है जो प्राचीन और गतिशील इतिहास के साथ एक चमकदार आधुनिक शहर है। इस शहर में बहुपक्षीय संस्‍कृति है जो पूरे राष्‍ट्र का एक लघु ब्रह्मान्‍ड कहा जा सकता है। इस शहर में एक साथ दो अनोखे अनुभव होते हैं, नई दिल्‍ली अपनी चौड़ी सड़कों और ऊंची इमारतों के साथ एक समकालीन शहर होने का अनुभव कराता है जबकि पुरानी दिल्‍ली की सड़कों पर चलते हुए आप एक पुराने युग... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:49:10 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : महाबलीपुरम में स्‍मारकों का समूह ]]></title>
            <description><![CDATA[ महाबलीपुरम दक्षिण भारत के शहर चेन्‍नई से लगभग 60 किलो मीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित एक मंदिर कस्‍बा है। यहां महाबलीपुरम के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं; तट मंदिर और रथ गुफा मंदिर इनमें से सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। तट मंदिर महाबलीपुरम का तट मंदिर चेन्‍नई के 50 किलो मीटर दक्षिण में स्थित एक तटीय गांव है, जिसका निर्माण राज सिंह के कार्यकाल में सातवीं शताब्‍दी के दौरान किया गया था और वे पल्‍लव कला के... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:16:55 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : हम्‍पी में स्‍मारकों का समूह ]]></title>
            <description><![CDATA[ चौदहवीं शताब्‍दी के दौरान मध्‍य कालीन भारत के महानतम साम्राज्‍यों में से एक, विजयनगर साम्राज्‍य की राजधानी, हम्‍पी कर्नाटक राज्‍य के दक्षिण में स्थित है। हम्‍पी के चौंदहवीं शताब्‍दी के भग्‍नावशेष यहां लगभग 26 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र में फैले पड़े हैं, इनमें विशालकाय स्‍तंभ और वनस्‍पति शामिल है। उत्तर में तुंगभद्रा नदी और अन्‍य तीन ओर पत्‍थरीले ग्रेनाइट के पहाडों से सुरक्षित ये भग्‍नावशेष मौन रह कर अपनी भव्‍यता, विशालता अद्भुत संपदा की कहानी कहते हैं। महलों और... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:11:31 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : जिंजी किला ]]></title>
            <description><![CDATA[ जिंजी पुंडुचेर्री में स्थित है जो दक्षिण भारत के उत्‍कृष्‍टतम किलों में से एक है। इसका निर्माण नौंवी शताब्‍दी में कराया गया था, जब यह चोल राजवंश के कब्‍जे में था, किन्‍तु यह किला आज जिस रूप में है वह विजय नगर के राजा का कठिन कार्य है, जिन्‍होंने इसे एक अभेद्य दुर्ग बनाया। एक समृद्ध शहर सात पहाडियों पर निर्मित कराया गया है, इनमें से सबसे प्रमुख हैं कृष्‍णागिरि, चंद्रागिरि और राजगिरि। ऊंची दीवारों से घिरा हुआ यह... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:00:30 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : एलिफेंटा की गुफाएं ]]></title>
            <description><![CDATA[ एलिफेंटा को घारापुरी के पुराने नाम से जाना जाता है जो कोंकणी मौर्य की द्वीप राजधानी थी, यह तीन शीर्ष वाली महेश मूर्ति की भव्‍य छवि के लिए जाना जाता है, जिनमें से प्रत्‍येक एक अलग रूप दर्शाता है। एलिफेंटा की गुफाएं मुम्‍बई महानगर के पास स्थित पर्यटकों का एक बड़ा आकर्षण केन्‍द्र हैं। एलिफेंटा द्वीप महाराष्‍ट्र राज्‍य के मुम्‍बई में गेटवे ऑफ इंडिया से 10 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। गुफा में बना यह मंदिर भगवान शिव का... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 12:53:00 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक :  शिवाजी टर्मिनस ]]></title>
            <description><![CDATA[ मुम्‍बई, महाराष्‍ट्र में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को पहले विक्‍टोरिया टर्मिनस के नाम से जाना जाता था, यह भारतीय पारम्‍परिक वास्‍तुकला से ली गई विषय वस्‍तुओं के मिश्रण सहित भारत में विक्‍टोरियन गोथिक पुन: जीवित वास्‍तुकला का एक उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है। यह टर्मिनस इन दोनों संस्‍कृतियों के बीच प्रभावों के महत्‍वपूर्ण आपसी बदलाव को दर्शाता है। इस भवन को ब्रिटिश वास्‍तुकार एफ. डब्‍ल्‍यू. स्‍टीवेंस में डिज़ाइन किया था और यह मुम्‍बई में एक गोथिक शहर के रूप में यहां की पहचान... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 12:17:48 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : सिटी पैलेस, उदयपुर ]]></title>
            <description><![CDATA[ झीलों के शहर, उदयपुर को पूर्व का वेनिस शहर कहा जाता है। महाराणा उदय सिंह - II ने 1568 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा उनके चित्तौड़गढ़ पर कब्‍ज़ा कर लेने के बाद उदयपुर की नींव रखी। दंत कथाएं कहती हैं कि उदय सिंह को एक पवित्र पुरुष ने पिछोला झील के पास पहाड़ी पर ध्‍यान करते हुए अपनी राजधानी इसी स्‍थान पर स्‍थापित करने का मार्गदर्शन दिया। अरावली श्रृंखला से घिरे, वनों और झीलों से युक्‍त इस स्‍थान को चित्तौड़गढ़... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 12:02:29 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : बेसिलिका ऑफ बोम जीसस (गोवा) ]]></title>
            <description><![CDATA[ पणजी से पूर्व दिशा में 10 किलो मीटर की दूरी पर मांडोवी नदी के साथ पुराना गोवा कस्‍बा बसा हुआ है, जहां भारत के कुछ महान गिरजाघर हैं और इनमें सबसे अधिक लोकप्रिय और सबसे अधिक सम्‍मानित चर्च हैं, जिन्‍हें दुनिया भर के ईसाई मानते हैं और यह है बेसिलिका ऑफ बोम जीसस। शिशु जीसस को समर्पित बेसिलिका को अब वैश्विक विरासत स्‍मारक घोषित किया गया है। बोम जीसस का अर्थ है शिशु जीसस या अच्‍छा जीसस। कैथोलिक दुनिया में... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 11:51:54 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : आमेर का किला ]]></title>
            <description><![CDATA[ जयपुर, राजस्‍थान की राजधानी से लगभग 11 किलो मीटर की दूरी पर आमेर किले का संकुल स्थित है। आमेर का किला दिल्‍ली - जयपुर राजमार्ग की जंगली पहाडियों के बीच अपनी विशाल प्राचीरों सहित नीचे माओटा झील के पानी में छवि दिखाता खड़ा हुआ है। राजपूत वास्‍तुकला के एक उत्‍कृष्‍ट उदाहरण के रूप में यह कच्‍छवाह शासकों की पुरानी राजधानी था। मूल रूप से यह महल राजा मानसिंह ने बनावाया था और आगे चलकर सवाई जयसिंह ने इस पर कुछ... ]]></description>
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            <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 11:47:44 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : लाल किला, दिल्‍ली ]]></title>
            <description><![CDATA[ दिल्‍ली का लाल किला का यह नाम इसलिए पड़ा क्‍योंकि यह लाल पत्‍थरों से बना है और यह दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली भव्‍य महलों में से एक है। भारत का इतिहास भी इस किले के साथ काफी नजदीकी से जुड़ा है। यहीं से ब्रिटिश व्‍यापारियों ने अंतिम मुगल शासक, बहादुर शाह जफर को पद से हटाया था और तीन शताब्दियों से चले आ रहे मुगल शासन का अंत हुआ था। यहीं के प्राचीर से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, पंडित जवाहर... ]]></description>
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            <pubDate>Sat, 05 Jun 2021 14:56:26 +0000</pubDate>
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        <item>
            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : शीश महल ]]></title>
            <description><![CDATA[ शीश महल या दर्पणों का महल पटियाला, पंजाब में है जिसका निर्माण महाराजा नरेन्‍द्र सिंह (1845-1862) ने मुख्‍य मोतीबाग मह‍ल के पीछे कराया था। यह महल छतों, बागीचों, फव्‍वारों तथा एक कृत्रिम झील के साथ जंगल में बनवाया गया था। इस झील में उत्तर तथा दक्षिण दिशा में दो निगरानी स्‍तंभ हैं और ये बानासर घर से जुड़े हैं जो खाल में भर कर बनाए गए जानवरों का एक संग्रहालय है। शीश महल, जो एक आवासीय महल था, में एक... ]]></description>
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            <pubDate>Sat, 05 Jun 2021 14:54:41 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : पुराना किला ]]></title>
            <description><![CDATA[ दिल्‍ली का पुराना किला यमुना नदी के किनारे एक छोटी पहाड़ी पर अपनी मजबूत दीवारों और शक्तिशाली प्रवेश द्वारों के साथ खड़ा है। इसके अंदर एक मस्जिद है जिसमें दो मंजिल का अष्‍टभुजी स्‍तंभ है। हिन्‍दु साहित्‍य के अनुसार यह किला इंद्र प्रस्‍थ के स्‍थल पर है जो पांडवों की विशाल राजधानी होती थी। जबकि इसका निर्माण अफगानी शासक शेर शाह सूरी ने तीसरी शताब्‍दी ने 1538 से 1545 के बीच कराया गया, जिन्‍होंने मुगल बादशाह हुमायुं से दिल्‍ली का... ]]></description>
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            <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 15:56:42 +0000</pubDate>
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        <item>
            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : मेहरानगढ़ का किला ]]></title>
            <description><![CDATA[ मेहरानगढ़ का किला राजस्‍थान में जोधपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। नीचे शहर की रक्षा करते हुए एक समानान्‍तर क्लिफ है, इस किले की स्‍थापना राव जोधा द्वारा 1459 ए. डी. में कराई गई थी, जब उन्‍होंने अपनी राजधानी मंदौर से यहां स्‍थानांतरित की। नीचे स्थित शहर के सामने अटल रूप से खड़ा यह किला ऊबड़ खाबड़ और पथरीली घाटी को नज़र अंदाज करता है और इसमें लम्‍बी तराशी गई कृतियों और लाल सैंड स्‍टोन से... ]]></description>
            <link>https://indoremeripehchan.in/culture-and-heritage/monuments-of-india-mehrangarh-fort</link>
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            <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 15:54:25 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : खजुराहो स्‍मारक समूह ]]></title>
            <description><![CDATA[ खजुराहो, प्राचीन खरज्‍जुरावाहक मध्‍य प्रदेश राज्‍य में स्थित है और यह चंदेल शासकों के प्राधिकार का प्रमुख स्‍थान था जिन्‍होंने यहां अनेकों तालाबों, शिल्‍पकला की भव्‍यता और वास्‍तुकलात्‍मक सुंदरता से सजे विशालकाय मंदिर बनवाए। यशोवरमन (एडी 954) ने विष्‍णु का मंदिर बनवाया जो अब लक्ष्‍मण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है और यह चंदेल राजाओं की प्रतिष्‍ठा का दावा करने वाले इसके समय के एक उदाहरण के रूप में एक आभूषण के रूप में स्थित है। खजुराहो के मंदिर अपनी... ]]></description>
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            <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 15:52:41 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : जामा मस्जिद (दिल्‍ली) ]]></title>
            <description><![CDATA[ जामा मस्जिद अर्थात शुक्रवार की मस्जिद, दिल्‍ली दुनिया की सबसे बड़ी और संभवतया सबसे अधिक भव्‍य मस्जिद है। यह लाल किले के समाने वाली सड़क पर है। पुरानी दिल्‍ली की यह विशाल मस्जिद मुगल शासक शाहजहां के उत्‍कृष्‍ट वास्‍तुकलात्‍मक सौंदर्य बोध का नमूना है, जिसमें एक साथ 25,000 लोग बैठ कर प्रार्थना कर सकते हैं। इस मस्जिद का माप 65 मीटर लम्‍बा और 35 मीटर चौड़ा है, इसके आंगन में 100 वर्ग मीटर का स्‍थान है। 1656 में निर्मित यह... ]]></description>
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            <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 15:49:46 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  : हिल पैलेस संग्रहालय, तिरुपुणिथुरा (केरल) ]]></title>
            <description><![CDATA[ हिल पैलेस कोची शाही परिवार का आधिकारिक निवास है, जो केरल का सबसे बड़ा पुरातात्‍विक संग्रहालय बन गया है। वर्ष 1865 में निर्मित इस महल के संकुल में 49 भवन केरल की पारम्‍परिक वास्‍तुकलात्‍मक शैली में शामिल हैं जो सुंदर मनोहारी दृश्‍यों के साथ 52 एकड़ से अधिक क्षेत्र फल में फैला है और यहां हिरण उद्यान और घोड़े पर सवारी की सुविधाएं हैं। यहां अनेक प्रकार के फूल हैं जिनमें दुर्लभ औषधीय पौधे उगाए जाते हैं। यहां पूर्ण सज्जित... ]]></description>
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            <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 15:47:18 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : पट्टा डक्‍कल में स्‍मारकों का समूहों, कर्नाटक ]]></title>
            <description><![CDATA[ कर्नाटक के दक्षिण राज्‍य में स्थित, स्‍मारकों का पट्टा डक्‍कल समूह उत्तरी तथा दक्षिणी भारत के वास्‍तुकलात्‍मक रूपों का सुम्‍मेलित मिश्रण दर्शाने के लिए प्रसिद्ध है। मध्‍य कालीन भारत के चालुक्‍य राजवंश की राजधानी पट्टा डक्‍कल बादामीन से 22 किलो मीटर की दूरी पर और बैंगलोर से 514 किलो मीटर की दूरी पर है। यह प्रसिद्ध विश्‍व विरासत स्‍थल 10 बड़े मंदिरों का समूह है, जिनमें से प्रत्‍येक में रोचक वास्‍तुकलात्‍मक विशेषताएं हैं। इसे सातवीं तथा आठवीं शताब्‍दी में नेतृत्‍व... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:54:29 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : स्‍वर्ण मंदिर,  अमृतसर (पंजाब) ]]></title>
            <description><![CDATA[ श्री हरमंदिर साहिब को श्री दरबार साहिब या स्‍वर्ण मंदिर भी कहा जाता है (इसके आस पास के सुंदर परिवेश और स्‍वर्ण की पर्त के कारण) और यह अमृतसर (पंजाब) में स्थित सिक्‍खों का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर सिक्‍ख धर्म का सहनशीलता तथा स्‍वीकार्यता का संदेश अपनी वास्‍तुकला के माध्‍यम से प्रवर्तित करता है, जिसमें अन्‍य धर्मों के संकेत शामिल किए गए हैं। दुनिया भर के सिक्‍ख श्री अमृतसर आना चाहते हैं और श्री हरमंदिर साहिब... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:50:45 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : गेटवे ऑफ इंडिया ]]></title>
            <description><![CDATA[ गेटवे ऑफ इंडिया अब मुम्‍बई शहर का पर्यायवाची बन गया है। यह मुम्‍बई का सबसे अधिक प्रसिद्ध स्‍मारक है और यह शहर में पर्यटन की दृष्टि से आने वाले अधिकांश लोगों का आरंभिक बिन्‍दु है। गेटवे ऑफ इंडिया एक महान ऐतिहासिक स्‍मारक है, जिसे देश में ब्रिटिश राज के दौरान निर्मित कराया गया था। यह पंचम किंग जॉर्ज और महारानी मेरी के मुम्‍बई (तत्‍कालीन बंबई) आगमन के अवसर पर उन्‍हें सम्‍मानित करने के लिए बनाया गया विशाल स्‍मारक था।... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:44:37 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : गोवा के गिरजा घर और कॉन्‍वेंट ]]></title>
            <description><![CDATA[ दक्षिणी भारतीय राज्‍य, गोवा में कुछ विश्‍व प्रसिद्ध गिरजाघर और कॉन्‍वेंट हैं विशेष रूप से चर्च ऑफ बॉम्‍ब जीसस, जिसमें सेंट फ्रेंसिस ज़ेवियर और सेंट कैथेड्रल के मकबरे हैं। ये स्‍मारक एशिया के देशों में मेन्‍यूएलाइन, मेनरिस्‍ट और बारोक कला के रूप विस्‍तारित करने में प्रभावशाली थे, जहां इनके मिशन स्‍थापित किए गए थे। बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस पूर्वी पणजी (गोवा की राजधानी) से 10 कि.मी. की दूरी पर है, जिसका निर्माण 16वीं शताब्‍दी में कराया गया था। ''बॉम जीसस''... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:42:27 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : सांची में बौद्ध स्‍तूप, मध्‍य प्रदेश ]]></title>
            <description><![CDATA[ सांची, जिसे काकानाया, काकानावा, काकानाडाबोटा तथा बोटा श्री पर्वत के नाम से प्राचीन समय में जाना जाता था और अब यह मध्‍य प्रदेश राज्‍य में स्थित है। यह ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्‍व वाला एक धार्मिक स्‍थान है। सांची अपने स्‍तूपों, एक चट्टान से बने अशोक स्‍तंभ, मंदिरों, मठों तथा तीसरी शताब्‍दी बी. सी. से 12वीं शताब्‍दी ए. बी. के बीच लिखे गए शिला लेखों की संपदा के लिए विश्‍व भर में प्रसिद्ध है। सांची के स्‍तूप अपने प्रवेश द्वारा के... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:39:39 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : चारमीनार, हैदराबाद ]]></title>
            <description><![CDATA[ हैदराबाद शहर प्राचीन और आधुनिक समय का अनोखा मिश्रण है जो देखने वालों को 400 वर्ष पुराने भवनों की भव्‍यता के साथ आपस में सटी आधुनिक इमारतों का दर्शन कराता है। यह कुतुब शाही वास्‍तुकला के कुछ उत्‍कृष्‍ट उदाहरणों को प्रदर्शित करता है - जामी मस्जिद, मक्‍का मस्जिद, तौली मस्जिद और बेशक हैदराबाद का प्रभावशाली चिन्‍ह, चार मीनार। चार मीनार 1591 में शहर के अंदर प्‍लेग की समाप्ति की खुशी में मोहम्‍मद कुली कुतुब शाह द्वारा बनवाई गई बृहत वास्‍तुकला... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:37:38 +0000</pubDate>
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        <item>
            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक : बाड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ ]]></title>
            <description><![CDATA[ भारत के उत्तर प्रदेश राज्‍य की राजधानी, लखनऊ एक आधुनिक शहर है, जिसके साथ भव्‍य ऐतिहासिक स्‍मारक होने का गर्व जुड़ा हुआ है। गंगा नदी की सहायक नदी, गोमती के किनारे बसा लखनऊ शहर अपने उद्यानों, बागीचों और अनोखी वास्‍तुकलात्‍मक इमारतों के लिए जाना जाता है। नवाबों के शहर के नाम से मशहूर लखनऊ शहर में सांस्‍कृतिक और पाक कला के विभिन्‍न व्‍यंजनों से अपने आकर्षण को बनाए रखा है। इस शहर के लोग अपने विशिष्‍ट आकर्षण, तहजीब और उर्दू... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:15:20 +0000</pubDate>
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        <item>
            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक :- अजंता और ऐल्‍लोरा गुफाएं ]]></title>
            <description><![CDATA[ दूसरी शताब्‍दी डी. सी. में आरंभ करते हुए और छठवीं शताब्‍दी ए. डी. में जारी रखते हुए अजंता तथा एलोरा की गुफाओं में बौद्ध धर्म द्वारा प्रेरित और उनकी करुणामय भावनाओं से भरी हुई शिल्‍पकला और चित्रकला पाई जाती है जो मानवीय इतिहास में कला के उत्‍कृष्‍ट अनमोल समय को दर्शाती है। बौद्ध तथा जैन सम्‍प्रदाय द्वारा बनाई गई ये गुफाएं सजावटी रूप से तराशी गई हैं। फिर भी इनमें एक शांति और अध्‍यात्‍म झलकता है तथा ये दैवीय ऊर्जा... ]]></description>
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            <pubDate>Thu, 03 Jun 2021 15:12:38 +0000</pubDate>
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        <item>
            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  :- सूर्य मंदिर कोणार्क ]]></title>
            <description><![CDATA[ कोणार्क का सूर्य मंदिर पुरी के पवित्र शहर के पास पूर्वी ओडिशा राज्‍य में स्थित है और यह सूर्य देवता को समर्पित है। यह सूर्य देवता के रथ के आकार में बना एक भव्‍य भवन है; इसके 24 पहिए सांकेतिक डिजाइनों से सज्जित हैं और इसे छ: अश्‍वखींच रहे हैं। यह ओडिशा की मध्‍यकालीन वास्‍तुकला का अनोखा नमूना है और भारत का सबसे प्रसिद्ध ब्राह्मण तीर्थ है। कोणार्क का मंदिर न केवल अपनी वास्‍तुकलात्‍मक भव्‍यता के लिए जाना जाता है... ]]></description>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:18:13 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक :- सेंट केथेड्रल,  गोवा ]]></title>
            <description><![CDATA[ गोवा की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित धार्मिक इमारतों में से यह भव्‍य 16वीं शताब्‍दी का स्‍मारक है, जिसे पुर्तगाल शासन के दौरान रोमन केथोलिक द्वारा बनाया गया था। यह एशिया का सबसे बड़ा चर्च है। यह केथेड्रल एलेक्‍सेंड्रिया के सेंट केथेरिन को समर्पित है, जिनके भोज्‍य दिवस पर 1510 में अल्‍फोंसो अल्‍बूकर्क ने मुस्लिम सेना को पराजित किया और गोवा शहर का स्‍वामित्‍व लिया। अत: इसे सेंट केथेरिन का केथेड्रल भी कहते हैं और यह पुर्तगाल में बने किसी भी... ]]></description>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:14:12 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  :- राष्‍ट्रपति भवन ]]></title>
            <description><![CDATA[ भारत के राष्‍ट्रपति का आधिकारिक निवास, राष्‍ट्रपति भवन नई दिल्‍ली में राजपथ के पश्चिमी सिरे पर स्थित एक प्रभावशाली भवन है, जिसका दूसरा सिरा इंडिया गेट पर है। इसे एडविन लैंडसीर ल्‍यूटियन ने डिजाइन किया था, यह आकर्षक भवन ब्रिटिश वाइ सराय का पूर्व निवास था। विश्‍व के राज्‍य प्रमुखों के कुछ आधिकारिक आवासीय परिसर इसके आकार, व्‍यापकता और विशालता में राष्‍ट्रपति भवन से तुलना योग्‍य है। ब्रिटिश वाइ सराय के लिए नई दिल्‍ली में एक आवास निर्मित करने का... ]]></description>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:11:04 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  :- नालंदा, पटना ]]></title>
            <description><![CDATA[ नालंदा प्राचीन काल का सबसे बड़ा अध्ययन केंद्र था तथा इसकी स्थापना पांचवी शताब्दी ईसवी में हुई थी। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष बोधगया से 62 किलोमीटर दूर एवं पटना से 90 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैं। माना जाता है कि बुद्ध कई बार यहां आए थे। यही वजह है कि पांचवी से बारहवीं शताब्दी में इसे बौद्ध शिक्षा के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था। सातवी शताब्दी ईसवी में ह्वेनसांग भी यहां अध्ययन... ]]></description>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:09:26 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  :- नालंदा, पटना ]]></title>
            <description><![CDATA[ नालंदा प्राचीन काल का सबसे बड़ा अध्ययन केंद्र था तथा इसकी स्थापना पांचवी शताब्दी ईसवी में हुई थी। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष बोधगया से 62 किलोमीटर दूर एवं पटना से 90 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैं। माना जाता है कि बुद्ध कई बार यहां आए थे। यही वजह है कि पांचवी से बारहवीं शताब्दी में इसे बौद्ध शिक्षा के केंद्र के रूप में भी जाना जाता था। सातवी शताब्दी ईसवी में ह्वेनसांग भी यहां अध्ययन... ]]></description>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:09:26 +0000</pubDate>
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            <title><![CDATA[ भारत के स्मारक  :- मीनाक्षी मंदिर, मदुरै ]]></title>
            <description><![CDATA[ मदुरै का पुराना शहर 2500 वर्ष से अधिक पुराना है और इसका निर्माण पांडियन राजा कुलशेखर ने 6वीं शताब्‍दी में कराया था। परन्‍तु इस नायक का कार्यकाल मदुरै का स्‍वर्ण युग कहा जाता है जब कला, वास्‍तुकला और अधिगम्‍यता बहुत अधिक फली फूली। शहर में सबसे सुंदर भवन सहित इसके सबसे प्रसिद्ध स्‍मारक शामिल हैं जैसे कि मीनाक्षी मंदिर, जिसे नायक शासन काल के दौरान बनाया गया था। मदुरै शहर के हृदय में स्थित मीनाक्षी - सुंदरेश्‍वर का मंदिर भगवान... ]]></description>
            <link>https://indoremeripehchan.in/culture-and-heritage/monuments-of-india-meenakshi-temple-madurai</link>
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            <pubDate>Wed, 02 Jun 2021 14:07:21 +0000</pubDate>
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